गाजीपुर। केंद्र व प्रदेश में सत्ता। किसानों व गांवों के विकास को लेकर तमाम प्रकार की कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन का दावा। दावा यह भी कि इन योजनाओं से समाज के अंतिम पायदान पर खड़ा व्यक्ति पूरी तरह से लाभान्वित हो रहा है। लेकिन भाजपा के इन तमाम दावों के बावजूद त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में लुटिया डूब गई। जनपद में जिला पंचायत की महज आधा दर्जन सीटों पर ही भगवा ब्रिगेड काबिज हो पाया। यह हालत उस समय है, जब भाजपा प्रदेश संगठन की ओर से इस चुनाव को लेकर बकायदे होमवर्क किया गया था। संगठन के तेजतर्रार व समर्पित नेताओं को इस चुनाव की कैंपेनिंग में उतार दिया गया था। लेकिन नतीजा निकला ढाक के तीन पात। पंचायत चुनाव में एक तरह से मतदाताओं ने भाजपा को पूरी तरह से खारिज कर दिया। इसको लेकर भाजपा के कुछ कार्यकर्ता सोशल मीडिया पर आरोप लगा रहे हैं कि जिला नेतृत्व की ओर से पंचायत चुनाव में कुछ सीटों पर सही चेहरों को बतौर प्रत्याशी मैदान में नहीं उतारा गया। यदि संगठन स्तर पर पार्टी के जुझारू व समर्पित चेहरों को बतौर प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतारा गया होता तो आज चुनाव परिणाम कुछ और होता। वहीं भाजपा की इस शर्मनाक हार को लेकर जवाबदेही तय करने की मांग की जा रही है। प्रदेश संगठन नेतृत्व से मांग की जा रही है कि समीक्षा करके जवाबदेह लोगों पर कार्रवाई की जाए, ताकि आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर एक सख्त व सही संदेश लोगों के बीच में जाए। अब यह देखने वाली बात होगी कि इन सब मांगों को लेकर भाजपा प्रदेश नेतृत्व का रुख कैसा रहता है। क्या इस चुनाव परिणाम की समीक्षा के बाद किसी की जवाबदेही तय करते हुए कोई कार्रवाई होगी कि नहीं।

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