गाजीपुर। यदि जिला पंचायत अध्यक्ष पद को लेकर जातीय समीकरण की बात की जाए तो पिछले बार इस कुर्सी पर यदुवंशी समाज का कब्जा रहा है। इसके पूर्व भी ज्यादातर समय इस कुर्सी पर इसी समाज का जलवा देखा गया। ऐसे में इस बार जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव को लेेकर यदुवंशी समाज की प्रतिष्ठा भी जुड़ गई है क्योंकि सवाल यह उठता है कि क्या इस बार भी यदुवंशी समाज इस प्रतिष्ठापरक सीट पर अपना वर्चस्व बरकरार रख पायेगा या फिर परिवर्तन होगा। क्या इस बार किसी गैर बिरादरी को इस कुर्सी पर काबिज होना का मौका मिलेगा या फिर यदुवंशी समाज की बादशाहत इस बार भी कायम रहेगी। इन सभी सवालों को लेकर यदुवंशी समाज के कुछ लोगों से बातचीत की गई। अधिकांश लोगों ने कहा कि यदुवंशी समाज का वर्चस्व इस बार भी कायम रहेगा। किसी भी कीमत पर इस कुर्सी पर दावेदारी ढीली नहीं पड़ने दी जायेगी। इसके पीछे उनकी ओर से तथ्यपूर्ण दलील भी दी गई। उनका साफ कहना है कि जब सबसे अधिक वोटर व संख्या हमारी है तो औरों को मौका क्यों। वाकई, यह दलील काफी तार्किक व ठोस है। यह ग्राउंड रियल्टी है कि 30 से अधिक संख्या में जीते जिला पंचायत सदस्य यदुवंशी समाज के हैं। यदि ये सभी एकराय होकर समाज के किसी एक चेहरे पर सहमति बना लेते हैं तो फिर कोई कारण नहीं नजर आता है कि इस बार भी यदुवंशी समाज के हाथ से यह बाजी फिसल जाए। यदुवंशी समाज से जुड़े लोगों का कहना है कि जिला पंचायत अध्यक्ष पद को लेकर रणनीति तैयार की जा रही है। रणनीति के तहत समाज के लोगों को एकजुट किया जायेगा। समाज के किसी एक चेहरे पर सर्वसम्मति बनाने के लिए दलीय राजनीति को भी किनारे कर दिया जायेगा। उनका साफ मानना है कि राजनीतिक जागरूकता के मामले में हमें गैर बिरादरियों से सीखने की जरूरत है। ये लोग केवल अपनी बिरादरी का चेहरा देखते हैं न कि दलीय विचारधारा। हमें भी इस पैटर्न पर आने की जरूरत है, यदि समाज से जुड़ा कोई मजबूत चेहरा सामने आता है तो उसके लिए दलीय राजनीति कतई बाधा नहीं बनेगी।