गाजीपुर। कुछ दिन पहले तक जब लोगों को सहायता की जरूरत थी तो उस समय उनकी सुध लेने वाला कोई जनप्रतिनिधि आगे आता हुआ दिखाई नहीं दिया। यहां तक कि स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की हकीकत जानने के लिए उस समय किसी भी सत्ताधारी दल के जनप्रतिनिधि की ओर से जिला अस्पताल वगैरह के निरीक्षण की जरूरत नहीं समझी गई। उस दौरान स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने के लिए स्थानीय जनप्रतिनिधियों की ओर से किसी प्रकार की कोई पहल करते हुए भी नहीं देखा गया। कोई पंचायत चुनाव में अपने दल के प्रत्याशियों के प्रचार में मशगूल था तो कोई पूरी तरह से लापता। यह हाल केवल सत्ताधारी जनप्रतिनिधि का ही नहीं रहा बल्कि अन्य दलों के जनप्रतिनिधियों का रवैया भी इसी प्रकार का रहा। सांसद से लेकर विधायकों तक का पता नहीं चला। सोशल मीडिया के माध्यम से जनपद के लोग अपने इस दर्द को साझा कर रहे हैं। अब चूंकि डीएम एमपी सिंह की पहल पर जिला अस्पताल में अधूरे आक्सीजन प्लांट का निर्माण पूरा करके उत्पादन शुरू कर दिया गया है तो ऐसे में सत्ताधारी दल के एक जनप्रतिनिधि की ओर से निरीक्षण करके बकायदे इसको सोशल मीडिया के माध्यम से पोस्ट किया गया। वहीं जनप्रतिनिधियों के बजाय लोग सोशल मीडिया पर जिलाधिकारी एमपी सिंह की कार्यशैली व उनकी संवेदनशीलता की तारीफ कर रहे हैं। यह डीएम की ही आज देन है कि जिले में आक्सीजन की कोई कमी नहीं है। पहले की अपेक्षा स्वास्थ्य व्यवस्थाएं सुदृढ़ हुई हैं। जिला अस्पताल में 200 से अधिक बेड का कोविड अस्पताल तैयार किया गया है। डीएम की ओर से व्यवस्था में पारदर्शिता लाते हुए आक्सीजन सिलेंडरों की जवाबदेही तय की गई। लापरवाही बरतने वाले दो डाक्टरों के खिलाफ कार्रवाई भी उनके द्वारा की गई। आज कोविड की लड़ाई में जनपद की स्वास्थ्य व्यवस्था बेहतर होती दिख रही है तो इसका पूरा श्रेय डीएम एमपी सिंह को जाता है। ऐसे में यदि कोई जनप्रतिनिधि अब फोटो खिंचवाकर आक्सीजन प्लांट या स्वास्थ्य व्यवस्थाओं का श्रेय लेना चाहे तो यह केवल दिखावा ही होगा।

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