बरेली। यूपी सरकार का दावा है कि सब ठीक है। आक्सीजन है, बेड है, किसी प्रकार की कोई दिक्कत नहीं। लेकिन ग्राउंड की सच्चाई क्या यही है। हम कुछ नहीं बोलेंगे, आप आम जनता हैं, जमीन के हालात से आप वाकिफ हैं, आप ही अपने दिल पर हाथ रखकर सोचिए कि यूपी सरकार जो दावा कर रही है क्या वह शत—प्रतिशत सही है। भाई, जब से यूपी सरकार का फरमान आया है कि कोविड को लेकर जो अफवाह, नकारात्मकता फैलायेगा, उसके खिलाफ रासुका लगाकर संपत्ति जब्त कर ली जायेगी, तब से अब कलमकार भी सहमे हैं। लिखने—पढ़ने से पहले सौ बार सोचना तो पड़ता ही हैं कि कहीं संपत्ति जब्त न हो जाए। लेकिन अब तो सत्ताधारी ही यूपी सरकार के दावों की पोल खोल रहे हैं। इस बार यह पोल खुली है केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार के पत्र से। उन्होंने यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखा है, जिसमें जिक्र किया है कि स्वास्थ्य विभाग के कुछ महत्वपूर्ण अधिकारी फोन तक नहीं उठाते हैं और रेफरल के नाम पर मरीज एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल में भटकते रहते हैं। उन्होंने अपने पत्र में कहा है कि मध्य प्रदेश में एमएसएमई के अंतर्गत आक्सीजन प्लांट लगाने के लिए अस्पतालों को सरकार द्वारा 50 प्रतिशत छूट दी जाती है। सुझाव दिया कि बरेली में भी कुछ निजी व सरकारी अस्पतालों को इस छूट के साथ जल्द से जल्द आक्सीजन प्लांट मुहैया कराया जाए ताकि आक्सीजन की कमी दूर हो सके। उन्होंने पत्र के जरिये अवगत कराया कि अस्पतालों में उपयोग होने वाले मल्टीपैरा मानीटर, बायोपैक मशीन, वेंटिलेटर समेत अन्य जरूरी उपकरणों की कालाबाजारी कर डेढ़ गुनी कीमत पर बेची जा रही है। इसलिए इनके कीमतों का निर्धारित जरूरी है।