वाराणसी। जब—जब हम महाभारत का जिक्र करते हैं तो अभिमन्यु का चित्रण भी स्वभाविक रूप से हमारे मन—मस्तिष्क पर विचरण करने लगता है। कई प्रसंगों में अभिमन्यु का जिक्र भी किया जाता है। जब भी ऐसा कोई मामला प्रकाश में आता है तो उसका उदाहरण हम स्वभाविक तौर पर अभिमन्यु व उनके खिलाफ रचे गये चक्रव्यूह से देते हैं। चक्रव्यूह यानी साजिश एक ऐसा शब्द है जो कि हमारे सभ्य होने के दौर से अपने अस्तित्व में है। मानव सभ्यता के अंदर जब बौद्धिक विकास का क्रम आया, तब से चक्रव्यूह या साजिश को बतौर राजनीतिक औजार अथवा हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जाता रहा है। जिस शख्स को सामने से चुनौती देने की क्षमता नहीं होती है तो उसके मनोबल को गिराने व हराने के लिए चक्रव्यूह रचा जाता है। चक्रव्यूह रचने में विरोधियों के अलावा कभी—कभी अपने भी शामिल होते हैं जो कि पूर्व तक हमारे सहयोगी की भूमिका में रहे। कुछ ऐसा ही मामला पूर्वांचल के घोसी सांसद अतुल राय का भी लग रहा है। ऐसा मानना उनके समर्थकों का है। हालांकि अतुल राय का पूरा मामला न्यायालय में विचाराधीन है और न्यायालय का जो भी फैसला होगा वह सभी के लिए सर्वमान्य होगा। इस पर अंगुली उठाने का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता है। लेकिन हर प्रकरण के दो पहलू होते हैं। पहले पहलू के अंतर्गत एक तस्वीर हमारे सामने स्पष्ट रूप से सामने आती है। दूसरे पहलू का हिस्सा इनसाइड स्टोरी में छिपा होता है। बीते समय में जिस प्रकार से जेल में बंद सजायफ्ता कैदी अंगद राय और दुष्कर्म का आरोप लगाने वाली पीड़िता के सहयोगी सत्यम प्रकाश राय की बातचीत का आडियो वायरल हुआ था। यदि यह आडियो सही है तो उससे इस बात की पुष्टि होती है कि कहीं न कहीं साजिश के तार जुड़े हुए हैं। ये पूरे तथ्य साजिश की ओर इशारा करते हैं। पूर्व में कचहरी में हुई प्रेस वार्ता में अतुल राय के वकील अनुज यादव की ओर से भी ऐसी ही बातें कहीं गई थीं। हांलाकि आडियो की प्रशासनिक स्तर पर पुष्टि होने की खबर अभी तक सामने नहीं आई। इसके अलावा पूर्वांचल की राजनीति पर नजर रखने वालों का मानना है कि अतुल राय प्रकरण के साजिश के हिस्से में ऐसे लोग भी साथ आ गये, जिनमें वैचारिक व सियासी तौर पर भिन्न—भिन्न दृष्टिकोण है। इनमें कुछ सत्ताधारियों से लेकर एक सपा नेता और उनके पूर्व के सहयोगियों का हाथ है। यानी यह कहा जाए कि इस चक्रव्यूह को रचने के लिए सांप—नेवले में दोस्ती हो गई तो गलत नहीं होगा। वैचारिक भिन्नता रखने वाले लोगों का एक साथ आना तो इसी बात को बल देता है। वैसे तय है कि न्यायालय में दोनों पक्षों की ओर से सारे तथ्यों को रखा जायेगा। अब सबकी निगाहें न्यायालय के फैसले पर टिकी हुई हैं। क्या सही है और क्या गलत है, इसका फैसला न्यायालय की ओर से किया जायेगा।

0 Comments