गाजीपुर। जहूराबाद विधानसभा से दो बार बसपा के टिकट पर एमएलए रहे पूर्व विधायक कालीचरण राजभर द्वारा सपा में शामिल होने का निर्णय कोई सामान्य सियासी घटनाक्रम नहीं है बल्कि इसके गहरे निहितार्थ हैं। पूर्वांचल की राजनीति को प्रभावित करने का माद्दा राजभर समाज रखता है। यही कारण है कि सभी राजनीतिक दल इनके महत्व से अच्छी तरह से वाकिफ हैं। सुभासपा अध्यक्ष व प्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री ओमप्रकाश राजभर की पहचान राजभर समाज के नेता के रूप में है हीं, साथ ही उनको राजनीतिक रूप से काउंटर करने व राजभर समाज में अपनी पैठ बनाने की गरज से भाजपा की ओर से लगातार मंत्री अनिल राजभर को प्रमोट किया जा रहा है। प्रदेश सरकार की ओर से महाराजा सुहेलदेव की जयंती मनाना इसी कवायद का एक हिस्सा है। राजभर समाज के वोट के लिए जारी जंग में अब सपा की भी इंट्री हो चुकी है। कालीचरण राजभर को सपा की सदस्यता दिलाकर समाजवादी पार्टी की ओर से इसका बिगुल बजा दिया गया है। सपा को भी मालूम है कि पूर्वांचल में राजभर समाज राजनीति को प्रभावित करने का पूरा प्रभाव रखता है। ऐसे में सपा को कालीचरण राजभर के रूप में एक ऐसा चेहरा मिल गया है, जिनके सहारे वह राजभर समाज का विश्वास जितने की पूरी कोशिश करेगी। इस पूरे सियासी जंग में राजभर समाज का साथ किस राजनीतिक पार्टी को मिलेगा, इसका खुलासा तो आगामी विधानसभा चुनाव में ही होगा। लेकिन इतना तय है कि राजभर समाज के वोट बैंक को लेकर भविष्य में कई और सियासी प्रयोग व दांव देखने को मिल सकते हैं।

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