दिल्ली। यदि नौकरी की बात की जाए तो इसके दो पहलू हैं। पहला देश में बेरोजगारों की लंबी फौज है तो दूसरी तरफ यह भी बात सत्य है कि जितने पढ़े—लिखे युवा हैं, इनमें से अधिकांश के पास संबंधित पद पर कार्य करने की योग्यता नहीं है। इनके पास केवल डिग्री है। ऐसे में सवाल है कि आखिर इसका जिम्मेदार कौन है जाहिर सी बात है इसका सीधा जवाब है कि हमारी शिक्षा प्रणाली व्यवस्था। परंपरागत, डिग्रीधारी व रटंतु शिक्षा व्यवस्था के कारण हमारे शिक्षित युवाओं के अंदर स्किल डेवलपमेंट हो ही नहीं पाया। यही कारण है कि वह शिक्षित होने के बाद भी इंड्रस्टीज के योग्य नहीं हैं। हमारे नीति—नियंताओं को इस ओर ध्यान देने की जरूरत है कि शिक्षा प्रणाली रोजगारपरक भी हो ताकि शिक्षा पूर्ण करने के बाद युवा नौकरी के लिए अयोग्य साबित न हों। इंडिया स्किल रिपोर्ट के आठवें संस्करण के जरिये बताया गया है कि भारतीय ग्रेजुएट्स में से आधे से भी कम रोजगार के योग्य हैं। रिपोर्ट के अनुसार 45.9 प्रतिशत ग्रेजुएट ही नौकरी पाने के योग्य हैं। 2020 में यह आंकड़ा 46.21 प्रतिशत था। 46.82 प्रतिशत के साथ सबसे अधिक नौकरी पाने वालों में बीटेक ग्रेजुएट्स शामिल हैं। इसके बाद दूसरा नंबर एमबीए डिग्रीधारकों की है।