लखनऊ। महाराजा सुहेलदेव जयंती योगी सरकार बड़े स्तर पर मनायेगी। लेकिन इस पूरे मामले का सियासी कनेक्शन भी है। राजभर समाज के लिए महाराजा सुहेलदेव काफी मायने रखते हैं। महाराजा सुहेलदेव के रूप में राजभर समाज का इस देश में एक स्वर्णिम इतिहास रहा है। इसी भावनात्मक तानेबाने के बीच भाजपा खुद को फीट बैठाये रखने की कोशिश कर रही है। हालांकि बीते विधानसभा चुनाव में भी भाजपा को राजभर समाज का समर्थन मिला था। लेकिन उस वक्त सुभासपा अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर भाजपा के साथ थे। अब चूंकि ओमप्रकाश राजभर भाजपा से अलग हो चुके हैं तो ऐसे में भाजपा की ओर से योगी सरकार के मंत्री अनिल राजभर को राजभर समाज के प्रतिनिधि के रूप में लगातार आगे किया जा रहा है ताकि ओमप्रकाश राजभर प्रकरण का कोई भी असर उसके सोशल इंजीनियरिंग अभियान पर असर न पड़े। इसी कवायद के तहत महाराजा सुहेलदेव जयंती मनाई जा रही है। पूर्वांचल में राजभर समाज सियासी रूप से निर्णायक की भूमिका में हमेशा रहता है। इसके अलावा प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी इस बिरादरी की अच्छी संख्या है। इसी वोट बैंक को ध्यान में रखते हुए भाजपा की ओर से लगातार इस समाज के साथ अपने भावानात्मक जुड़ाव को मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है। इसी क्रम में बहराइच में सीएम योगी आदित्यनाथ महाराजा सुहेलदेव स्मारक स्थल चित्तौरा पहुंचेंगे। वह शुभ मुहूर्त में स्मारक स्थल के उत्थान की आधारशिला रखेंगे। वहीं देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वर्चुअल तरीके से महाराजा सुहेलदेव के बारे में अपनी बातों को रखेंगे। एक तरह से इस कार्यक्रम के जरिये प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री राजभर समाज को संदेश देने का काम करेंगे। भाजपा इस बात को बखूबी जानती है कि आगामी विधानसभा चुनाव में दोबारा विजय पताका फहराने के लिए जरूरी है कि पिछड़ी जातियां उसके साथ जुड़ी रहे, इसी कवायद के तहत राजभर समाज को साधने की कोशिश की जा रही है।

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