दिल्ली। पुडुचेरी में सियासी शह—मात का खेल शुरू हो गया है। इसकी बिसात बिछनी शुरू हो गई है। उपराज्यपाल किरण बेदी को हटाया जाना इसी शह—मात का एक हिस्सा है। इस पूरे सियासी गणित के पीछे भाजपा के निशाने पर कांग्रेस सरकार है। आगामी तीन महीनों में पांच प्रदेशों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। इसी कड़ी में दक्षिण भारत के अंतर्गत आने वाले पुडुचेरी में भी चुनाव होना तय है। यहां पर पांच वर्षों से कांग्रेस की सरकार है। चूंकि तमिलनाडु व केरल की अपेक्षा यहां पर भाजपा को ज्यादा सियासी संभावनाएं नजर आ रही हैं, यही कारण है कि यहां पर घटनाक्रम काफी तेजी से बदल रहे हैं। सबसे रोचक बात यह है कि पश्चिम बंगाल की तरह यहां पर भी सत्तापक्ष के विधायक आये दिन भाजपा में शामिल हो रहे हैं। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि यही हाल रहा तो चुनाव नजदीक आते—आते कहीं कांग्रेस की सरकार चली न जाए। जिसके कारण राष्ट्रपति शासन लगाने की नौबत तक आ सकती है। वहीं बताया जा रहा है कि मनमाने फैसलों के लिये जाने के कारण किरण बेदी की छुट्टी कर दी गई। उनके फैसलों से जहां सरकार अक्सर नाराज रहती थी तो वहीं भाजपा भी खुद को असहज महसूस करती थी। ऐसे में चुनाव से पूर्व उनको हटाकर एक तरह से यह मुद्दा भाजपा ने कांग्रेस के हाथों से छीन लिया है ताकि उनके मनमाने रवैये को कांग्रेस चुनाव के दौरान भुना न सके।