दिल्ली। यूपी के पूर्वांचल के बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी को पंजाब से उप्र लाने का प्रकरण अब राष्ट्रीय फलक पर आ चुका है। पूरे देश की निगाहें इस मुद्दे पर लगी हुई हैं। चूंकि इस पूरे मामले को लेकर यूपी व पंजाब आमने—सामने है तो जाहिर सी बात है यह प्रकरण अब प्रदेश की सीमाओं को तोड़ते हुए अपनी पहचान राष्ट्रीय स्तर पर बना लिया है। देश के सियासतदानों समेत अपराध जगत से जुड़े लोगों की नजर भी इस मुद्दे पर है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि दो वर्षों से पंजाब की जेल में बंद मुख्तार अंसारी की ओर से जमानत के लिए आवेदन ही नहीं किया गया। दूसरी तरफ पंजाब पुलिस भी चार्जशीट फाइल नहीं की। सुप्रीम कोर्ट में इस बात का उल्लेख यूपी सरकार की ओर से भी किया गया था। फिरौती मांगने के मामले में मुख्तार अंसारी पंजाब के रूपनगर यानी रोपड़ जेल में हैं। दो वर्ष पूर्व प्रोडक्शन वारंट पर पंजाब पुलिस मुख्तार अंसारी को यूपी के बांदा जेल से पंजाब लाई थी। लेकिन सवाल यह है कि दो वर्षों में फिरौती मांगने के मामले में पंजाब पुलिस की ओर से चार्जशीट फाइल क्यों नहीं की गई। वहीं मुख्तार अंसारी की ओर से इस मामले में जमानत के लिए आवेदन क्यों नहीं किया गया। जबकि कानून के अनुसार यदि निर्धारित समयावधि में चार्जशीट फाइल नहीं होती है तो मुल्जिम को जमानत मिल जानी चाहिए लेकिन ऐसा हुआ नहीं है। मालूम हो कि एक बिल्डर की ओर से आरोप लगाया गया था कि फोन करके उससे 10 करोड़ की फिरौती मांगी गई थी और उसने अपना नाम कोई अंसारी बताया था। ऐसे में जांच इस बात की भी होनी चाहिए कि आखिर जेल के अंदर से फोन कैसे हुआ। आखिर इस बात की जांच पंजाब पुलिस क्यों नहीं कर रही है। फिलहाल पूरा मामला कोर्ट में है। सभी लोग इस बात को लेकर उत्सुक हैं कि क्या मुख्तार अंसारी को यूपी लाया जायेगा या नहीं। यदि लाया जायेगा तो आखिर कब।

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