दिल्ली। कर्ज एक ऐसा शब्द है जो आज की वैश्विक व मानवीय व्यवस्था की कड़वी सच्चाई है। उद्योगपति से लेकर मध्यम वर्ग व गरीब तबके तक के लोग कर्ज या लोन का सहारा अपनी व्यवस्थाओं को संचालित करने के लिए लेते हैं। जनता की बात छोड़िए सरकारें तक कर्ज लेती हैं। चाहे वह कोई गरीब देश हो या फिर अमेरिका जैसा सुपरपावर देश हो। वैश्विक संक्रमण के कारण पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था प्रभावित हुई है। हर देश का बजट इसके कारण गड़बड़ा गया। यहां तक कि महाशक्ति अमेरिका की अर्थव्यवस्था भी इससे प्रभावित हुए बगैर नहीं रह सकी। जबकि अमेरिकी अर्थव्यवस्था भारत के मुकाबले 7 गुना बड़ी है। यह 21 ट्रिलियन डॉलर की है। एक रिपोर्ट के अनुसार दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था पर कर्ज का बोझ 29 ट्रिलियन डॉलर यानी 29 लाख करोड़ डॉलर हो चुका है। भारतीय अर्थव्यवस्था की अपेक्षा यह 10 गुना अधिक है। अमेरिका ने भारत से 216 अरब डॉलर यानी लगभग 15 लाख करोड़ का कर्ज लिया है। 2020 के आंकड़ों के अनुसार प्रत्येक अमेरिकी 72309 डॉलर यानी 52 लाख से अधिक का कर्जदार है। अमेरिकी कांग्रेस Alex Mooney के अनुसार अमेरिका ने सबसे अधिक चीन व जापान से कर्ज लिया है। यदि रिश्तों के हिसाब से देखा जाए तो चीन दोस्त के बजाय हमेशा से अमेरिका के लिए प्रतिद्धंदी ही रहा है। ऐसे में यह काफी दिलचस्प व हैरान करने वाला है। अमेरिका पर ब्राजील का भी 258 बिलियन डॉलर का कर्ज है।

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