वाराणसी। होली अगले महीने है लेकिन इसको लेकर अभी से कई भोजपुरी गीत मार्केट में आने लगे हैं। आने वाले समय में अभी कई गीत आयेंगे। कुछ लोक गीतकारों व गायिकाओं की ओर से देवर—भाभी व जीजा—साली के रिश्तों को प्रसंग बनाकर अश्लील होली गीत की प्रस्तुति की जा रही है। बात केवल इसी साल की नहीं है बल्कि हर वर्ष ऐसा होता है। भोजपुरी में अश्लील गीतों का मुद्दा लंबे समय से बना हुआ है। शुरुआत में इन गानों के बोल द्विअर्थी होते थे लेकिन अब तो सारी मर्यादा को ही ताक पर रख दिया गया है। दिन—प्रतिदिन अश्लीलता का स्तर बढ़ता जा रहा है। इसके पीछे प्रमुख कारण यह है कि जिन गायक व गायिकाओं को कोई जानता तक नहीं है, वह ऐसे गीत व गानों की प्रस्तुति करके कम समय में दौलत व शोहरत कमा लेते हैं। जब कोई परिवार संग जीप, बस या टेंपो में यात्रा करता है और उस समय ऐसे गीत बजते हुए तो सभ्य लोग शर्मसार होते हैं। सवाल है कि क्या ऐसे गीतकारों के लिए किसी प्रकार का कोई सेंसर बोर्ड नहीं है, ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है कि इनकी समाज के प्रति जवाबदेही तय हो। इनको बेलगाम कैसे छोड़ दिया गया है। जिन्हें लोक कलाकार शब्द का अर्थ तक पता नहीं होता है, वह लहंगा…हीटर जैसे गाने गाकर खुद को चमकाने का काम करते हैं। मार्केट में ऐसे गाने मौजूद हैं, जिनका उल्लेख हम यहां पर नहीं कर सकते हैं। ऐसे बेहूदा गायक ही भोजपुरी कला जगत को बदनाम करने का काम करते हैं। ऐसे गायकों व गायिकाओं की गीतों व गानों का बहिष्कार सामाजिक स्तर पर भी होना चाहिए। वैसे सरकार को इस ओर ध्यान देने की जरूरत है। इन गानों का सबसे गलत प्रभाव किशोरमन पर पड़ता है। ऐसे गीत व गाने अप्रत्यक्ष रूप अपराध को बढ़ावा देने का भी कार्य करते हैं।

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