दिल्ली। यूपी में आगामी विधानसभा को लेकर हलचल तेज हो गई है। हर दल की गतिविधियों में तेजी दिखाई दे रही है। लेकिन एक चीज बेहद दिलचस्प है, वह यह है कि सत्ता में भाजपा है लेकिन घेरने का काम सपा को किया जा रहा है। ओवैसी की इंट्री के बाद से ही यूपी की राजनीति गरमा गई है। असल में यूपी सरकार के पूर्व मंत्री व दिग्गज सपा नेता आजम खां के बहाने ओवैसी व कांग्रेस की ओर से सपा को कटघरे में खड़ा किया जा रहा है। सियासी हलके में माना जा रहा है कि जब से आजम खां जेल गये हैं और जिस प्रकार से उप्र सरकार की ओर से उनके खिलाफ ताबड़तोड़ कार्रवाई की गई, उसको लेकर जिस तरह से अखिलेश यादव को उनके साथ खड़ा होना चाहिए था, वह नजर नहीं आया। इसी मुद्दे को लपकते हुए ओवैसी की ओर से जेल में बंद आजम खां को संदेश भेजवाया गया कि वह उनसे मिलना चाहते हैं। इधर कांग्रेस नेता शाहनवाज की ओर से भी सपा पर हमला करते हुए कहा गया कि जब सपा आजम खां की लड़ाई नहीं लड़ सकती है तो वह अल्पसंख्यकों का भला कैसे साथ देगी। मामले की नजाकत को भांपते हुए अखिलेश यादव तुरंत सक्रिय हुए और वह आजम खां के घर उनके परिजनों से मिलने पहुंच गये। लेकिन इसके बावजूद विरोधी यह कह रहे हैं कि ओवैसी फैक्टर के कारण अखिलेश यादव की ओर से यह कदम उठाया गया। यदि ओवैसी व आजम खां की मुलाकात की चर्चा न होती तो संभवत: अभी भी वह ऐसी पहल नहीं किये होते। कुल मिलाकर यूपी की राजनीति में ओवैसी की इंट्री के बाद सपा को मशक्कत करनी पड़ रही है क्योंकि ओवैसी के सीधे निशाने पर सपा है। बीते दिनों पूर्वांचल के दौरे पर आए ओवैसी ने बयान के जरिये भी पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पर हमला बोला था। इन सब सियासी घटनाओं के पीछे अल्पसंख्यक वोट बैंक को अपने पाले में खींचने की कवायद है। दूसरी तरफ सपा की भरसक कोशिश है कि वह अपने इस वोट बैंक में किसी तरह से सेंधमारी न होने दे। यही कारण है कि आजम खां के पक्ष में अब साइकिल यात्रा निकालने का एलान किया गया। आने वाले दिनों में यूपी की राजनीति में कई और दिलचस्प घटनाक्रम देखने को मिल सकते हैं।

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