गाजीपुर। छात्रनेता दीपक उपाध्याय की ओर से स्वास्थ्य विभाग की ओर से गंभीर आरोप लगाये गये हैं। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री एवं विश्व पटल पर महामानव के रूप में अपनी पहचान स्थापित कर रहे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी केंद्र से लेकर प्रदेश तक में संचालित हो रही अपनी सरकार को गांव, गरीब, मजदूर, किसान की सरकार बताते नहीं थक रहे हैं, सबका साथ, सबका विकास इस तरह के दावे इन लोगों की तरफ से किये जाते रहे हैं परंतु आज जनता के साथ जो कुछ हो रहा है उसने एहसास करा दिया है कि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के बड़े-बड़े दावों के बावजूद जमीनी हकीकत कुछ और ही है, वाक्य कुछ यूं है कि जिला चिकित्सालय पर जब मरीज को लेकर अपने परिजन पहुंच रहे हैं तो वहां उपस्थित चिकित्सकों से लेकर चिकित्साकर्मियों द्वारा सेवा के स्थान पर खुलेआम दुर्व्यवहार और सौदेबाजी की जा रही है न तो उन्हें भगवान का डर है और ना ही सत्ता या सरकार का कोई खौफ है साथ ही साथ इनके बाबत जब कोई पीड़ित जिला प्रशासन के उच्चाधिकारियों से संपर्क साधने की कोशिश करता है तो शिकायत सुनना तो दूर कोई जिम्मेदार अधिकारी जनता का फोन उठाने की भी जहमत नहीं उठा रहा है। हालात यह है कि शिकायत दर्ज कराने वाला मरीज या उसका परिजन अपने नसीब को कोसते हुए घर जाने को विवश व लाचार हैं। इसी क्रम में छात्रसंघ के पूर्व उपाध्यक्ष दीपक उपाध्याय अपनी मां को रैबीज इंजेक्शन लगवाने के लिए सदर अस्पताल पहुंचें तो वहां इंजेक्शन कक्ष में कोई कर्मचारी ही मौजूद नहीं था। छात्र संघ उपाध्यक्ष दीपक उपाध्याय ने बताया कि इंजेक्शन कक्ष में दस बजे से लेकर एक बजे तक बैठा रहा और ना तो कोई नोटिस लगाई गई थी और ना ही कोई कर्मचारी मौजूद था, वहां मौजूद अन्य मरीज भी काफी परेशान थे तो बीमार मां के साथ परेशान हालत में उन्होंने ने तत्काल जिला चिकित्सालय के उच्चाधिकारियों से संपर्क साधने कि कोशिश किया तो किसी ने फोन उठाने कि जरूरत नहीं समझी। काफी भीड़ जुटने पर वहां भीड़ बेकाबू देख आनन- फानन में एक कर्मचारी आकर नोटिस चस्पा किया कि रैबीज इंजेक्शन खत्म हो गया है जिससे आम जन-मानस और भड़क उठी तब तक मौके कि नजाकत देख मौजूदा कर्मचारी वहां से नौ दो ग्यारह हो गया इस बाबत छात्र नेता ने सारी घटनाक्रम को विडियो में कैद कर लिया और सोशल मीडिया और प्रिंट मीडिया के माध्यम से माननीय मुख्यमंत्री और जिलाधिकारी से मांग कि है कि जनपद कि बद से बद्तर हो चुकी चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाओं को तत्काल चुस्त-दुरुस्त कराया जाए एवं आज की घटना के जिम्मेवार व कर्तव्य में लापरवाही दिखाने वाले चिकित्साकर्मी पर तत्काल आवश्यक कार्रवाई करायी जाय ताकि भविष्य में किसी मरीज या उसके पीड़ित परिजन के साथ इस तरह के घटना कि पुनरावृत्ति न हो सके।

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