दिल्ली। एलियन को लेकर विज्ञान जगत में शुरू से बहस चल रही है। इसको लेकर विज्ञान जगत में दो गुट है। वैज्ञानिकों का एक पक्ष एलियन की मान्यता को स्वीकृति प्रदान करता है तो दूसरा खेमा सदैव से इंकार करता रहता है। वैसे पहले आप जान लिजिए कि एलियन कहते किसे हैं। एलियन का तात्पर्य परजीवी ग्रह से है। वैज्ञानिकों में वर्षों से इस बात को लेकर उत्सुकता रही है कि क्या हमारे ग्रह के अलावा भी किसी अन्य ग्रह पर जीवन की कोई संभावना है। उड़न तश्तरी की थ्योरी भी एलियन से ही जोड़ा जाता है। अन्य ग्रहों पर जीवन किसी रूप में भी हो सकता है। जरूरी नहीं है कि मानव के रूप में ही जीवन मिले। वैज्ञानिक इस बात को लेकर बहस करते रहते हैं कि एलियन मानव जाति से उन्नत सभ्यता है अथवा अभी विकास के दौर में। दबी जुबां तो यह भी कहा जाता है कि अमेरिका के एरिया 51 के अंदर एलियंस रहते हैं। कुछ लोग कहते हैं कि यह स्थान रिसर्च सेंटर है। वैसे जो भी हो लेकिन इतना तय है कि अमेरिका का एरिया 51 रहस्यमयी जगह है। आम अमेरिकन की बात छोड़िए वहां के ज्यादातर उच्च पदों पर तैनात अधिकारियों को भी इसके बारे में पूरी जानकारी नहीं है। अमेरिका के एरिया 51 में आम लोगों के आवागमन पर पूरी तरह से पाबंदी है। कुछ जानकारों का यह भी कहना है कि अमेरिका व नासा को एलियंस के बारे में बहुत कुछ जानकारी है लेकिन वे इसको साझा नहीं करते हैं। खैर, एलियंस की पृष्ठभूमि को लेकर बहुत चर्चा हो गई, अब आते है विषय पर। दो वर्ष पूर्व 2018 में हमारे सौर मंडल में एक नया मेहमान आया। इसका नाम ओउमुआमुआ रखा गया है। वैज्ञानिकों ने पहले सोचा कि यह एक एस्टेरॉयड है लेकिन अब कहा जा रहा है कि यह एलियन टेक्नोलॉजी है। चूंकि सिगार के आकार का यह पत्थर धीरे—धीरे अपनी जगह से खिसक रहा है, इसलिए इसे एलियन टेक्नोलॉजी माना जा रहा है। ऐसा लग रहा है कि जैसे कोई इसको धक्का दे रहा है। जबकि कुछ महीनों पहले तक यह अपने जगह पर पूरी तरह से स्थिर था। वैज्ञानिक इसको लेकर माथापच्ची कर रहे हैं कि आखिर ऐसा क्यों हो रहा है। हावर्ड यूनिवर्सिटी के अंत​रिक्ष वैज्ञानिक एवी लोएब का मानना है कि इस वस्तु को एक ​एलियन मशीन खींच रही है जो एक मिलीमीटर से भी पतली है या फिर इसे सौर विकिरण यानि सोलर रेडिएशन अपनी ओर खींच रहा है। वहीं कुछ वैज्ञानिकों का कहना है कि इसकी चाल अपने आप बदल रही है क्योंकि इसके चारों तरफ सॉलिड हाइड्रोजन का ब्लास्ट हो रहा है। जिसकी वजह से ये लगातार अपनी गति व दिशा बदल रहा है। 17 अगस्त को द एस्ट्रोफिजिकल जर्नल लेटर्स में एवी लोएब व थियेम होआंग ने हाइड्रोजन ब्लास्ट की थ्योरी को खारिज करते हुए कहा कि ऐसा नहीं हो सकता। ये जरूर संभव है कि हमारे सौर मंडल में एलियंस आते हों। वहीं शिकागो यूनिवर्सिटी के अं​तरिक्ष वैज्ञानिक डैरिल सेलिगमैन कहते हैं कि ओउमुआमुआ आया तो था एस्टेरॉयड की तरह लेकिन इसके पीछे कोई पूंछ नहीं है न ही कोई रोशनी। इसलिए यह तो निश्चित है कि यह हमारे सौर मंडल से बाहर से आया है। वहीं इसका आकार 1300 से 2600 फीट लंबा बताया जा रहा है। यह धीमे राकेट इंजन की तरह हमारे सौर मंडल में घूम रहा है।