गाजीपुर। ग्राम प्रधान जनप्रतिनिधि होता है और जनप्रतिनिधि किसी भी प्रकार की समस्या होने पर संबंधित अधिकारियों से मिलकर या टेलीफोनिक वार्ता के जरिये उनको अवगत करा सकता है। लेकिन यदि कोई प्रधान ऐसा न करके सोशल मीडिया का सहारा ले तो फिर क्या कहा जाए। सोशल मीडिया या ऐसे प्लेटफार्म का सहारा उस समय लिया जाता है, जब आपकी सुनवाई नहीं हो रही हो। निश्चित रूप से ऐसे कृत्य से संबंधित जनप्रतिनिधि की छवि पर भी असर पड़ता है। इससे यह भी पता चलता है कि उक्त जनप्रतिनिधि अपने पद व दायित्व को लेकर कितना गंभीर है। मामला नंदगंज क्षेत्र के सौरम गांव का है। ग्राम प्रधान सीमा जायसवाल की ओर से सोशल मीडिया पर डीएम एमपी सिंह को संबोधित एक पत्र वायरल किया गया। पत्र का मजमून कुछ इस प्रकार रहा कि — श्रीमान जिलाधिकारी महोदय, मेरे गांव सौरम में कोरोना महामारी से मरने वालों की संख्या दिनों—दिन बढ़ती जा रही है। पिछले 15 दिन में अब तक 16 लोगों की मौत हो चुकी है। मरने वालों की संख्या व नाम निम्नलिखित है…। अब आप सोचिए कि यह पत्र सोशल मीडिया पर वायरल न करके यदि सीधे डीएम को दिया गया होता तो कितना बेहतर होता। यदि मान लिए जाए कि कोरोनाकाल व लॉकडाउन का दौर चल रह है। जिला मुख्यालय आने में असुविधा व असमर्थता है तो यह प्रकरण डीएम को मोबाइल के जरिये भी तो बताया जा सकता था। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बगैर जांच के पत्र में मृतकों का कनेक्शन कोरोना संक्रमण से जोड़ दिया गया। जबकि प्रदेश सरकार की ओर से सख्त हिदायत दी गई है कि कोरोना संक्रमण को लेकर किसी भी प्रकार की अफवाह न फैलाई जाए। वहीं ग्राम प्रधान का पत्र वायरल होने व मामला संज्ञान में आने के बाद प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया। डीएम की ओर से तुरंत गांव में स्वास्थ्य टीम को भेजा गया। स्वास्थ्य टीम की ओर से कैंप लगाकर 71 लोगों की जांच की गई। हालांकि इनमें से एक भी लोग कोरोना पॉजिटिव नहीं मिले हैं। मंगलवार को दो और जांच टीम वहां जायेगी और 200 लोगों का एंटीजेन टेस्ट करेगी। खैर, पूरा मामला क्या है, यह तो जांच पूरी होने के बाद भी पता चल पायेगा। वहीं बताया जा रहा है कि लगातार मौत होने के कारण ग्रामीण भयभीत हैं।