वाराणसी। कुछ ही दिनों पहले भाजपा विधायक अलका राय की ओर से कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी को तीसरी बार पत्र लिखा गया था। पत्र में जिक्र किया गया था कि यदि मुख्तार अंसारी से उनको व उनके परिवार को किसी भी तरह से नुकसान होता है तो इसके लिए कांग्रेस पार्टी व प्रियंका गांधी जिम्मेदार होंगी। उनकी मांग थी कि पंजाब की कांग्रेस शासित सरकार मुख्तार अंसारी को संरक्षण देना बंद करे और यूपी वापस भेजना सुनिश्चित करे। अलका राय गाजीपुर के मुहम्मदाबाद विधानसभा सीट से विधायक हैं। वह भाजपा विधायक स्व. कृष्णानंद राय की पत्नी हैं। वहीं अब कांग्रेस नेता व पूर्व विधायक अजय राय की ओर से राज्यपाल को पत्र लिखा गया है। उन्होंने पत्र के जरिये बताया है कि मुख्तार अंसारी से उनकी सुरक्षा को लेकर राज्य सरकार की ओर से लापरवाही बरती जा रही है। एक तरह प्रदेश की योगी सरकार पर भी निशाना साधा गया है। उनका पत्र कुछ इस प्रकार है।
राज्यपाल महोदया यह कितने हैरत की बात है कि आज जहां एक बार एमएलए बन जाने पर लोगों को सरकार समर्थित हर तरह की सुरक्षा मुहैया हो जाया करती है, वहीं मैं अजय राय वाराणसी के पिंडरा विधानसभा से पांच बार विधायक व पूर्व मंत्री रह चुका हूं। मेरी सुरक्षा को लेकर वर्तमान भाजपा सरकार द्वारा बेहद घृणित मानसिकता के साथ काम कर रही है। यह सर्वविदित है कि मेरे लगभग तीन दशकों के सार्वजनिक जीवन में एक भी ऐसा कोई आरोप नहीं लगा जो कि कानून की नजर में आपत्तिजनक हो या फिर अलोकतांत्रिक हो। अपने तीन दशकों के सार्वजनिक जीवन में मैंने दीन—दुखियों, अशक्तजनों के हितों के संरक्षण को लेकर जो काम किया है, वह दीगर है। वस्तुत: मैं पूर्व विधायक अजय राय अपने बड़े भाई स्व. अवधेश राय की हत्या का चश्मदीद गवाह हूं, जिसका मुकदमा अभी भी एमपी एमएलए कोर्ट इलाहाबाद में चल रहा है। उनकी गवाही कुख्यात अपराधी मुख्तार अंसारी के खिलाफ है। पिछले दिनों उप्र सरकार द्वारा मेरी सुरक्ष को लेकर छह फरवरी को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक पत्र भी लिखा था, जिसमें मैंने अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता जाहिर की थी पर हैरत की बात है कि उस पत्र को लेकर मुख्यमंत्री द्वारा कोई यथोचित कार्यवाही नहीं की गई बल्कि उलटे जो दस प्रतिशत व्यय पर मेरी सुरक्षा थी उसे भी हटा लिया गया जो कि बेहद अफसोसनाक व दुर्भाग्यपूर्ण है। मेरी सुरक्षा को लेकर वर्तमान राज्य सरकार द्वारा जो रवैया अपनाया जा रहा है, वह बेहद अलोकतांत्रिक व गैरकानूनी है। इससे स्पष्ट प्रतीत होता है कि योगी आदित्यनाथ सरकार मेरी हत्या करवाने पर आमदा है। लोकतंत्र में विपक्ष का अर्थ शत्रु नहीं होता बल्कि सहयोगी हुआ करता है पर दुर्भाग्य की बात है योगी सरकार को इसकी अहमियत ही नहीं मालूम। क्या राज्य सरकार यह कार्यवाही यथोचित व कानून संगत है। मेरे द्वारा बार—बार अपनी सुरक्षा को लेकर जो चिंता व्यक्त की गई है फिर भी अगर सरकार द्वारा कोई निर्णायक कार्यवाही नहीं किये जाने पर अगर मेरे साथ कोई अप्रिय घटना घटित होती है तो इसकी पूरी जिम्मेदारी योगी आदित्यनाथ सरकार की होगी।

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