दिल्ली। यदि आप इस देश में रसूखदार हैं, बाहुबली हैं और माफिया हैं तो आप कानून, संविधान व पूरे सिस्टम से उपर हैं। ये सब चीजें केवल आम जनता के लिए हैं, रसूखदार, बाहुबली व माफिया तो इन्हें केवल खिलौना समझते हैं। यदि इसका उदाहरण देखना है तो आप यूपी के माफियाओं व बाहुबलियों को देख सकते हैं। यदि कोई माफिया या बाहुबली अस्वस्थ है तो उसे एयर एंबुलेंस से भी तो लाया जा सकता है। लेकिन इस मामले में हमारा सिस्टम सक्रियता नहीं दिखायेगा। वैसे माफियाओं व बाहुबलियों के अस्वस्थता के खेल से आम जनता भी पूरी तरह से वाकिफ है। कैसे वह अपनी सुविधानुसार समय—समय पर खुद को अस्वस्थ घोषित करवाते हैं और कैसे स्वस्थ हो जाते हैं। जिन माफियाओं के उपर दर्जनों हत्याओं का आरोप है। कोर्ट में उनकी पेशी के दौरान सुरक्षा व्यवस्था इस कदर पुख्ता रहती है, जैसे वह कोई संवैधानिक पद पर विराजमान व्यक्ति हो या फिर देश का कोई हस्ती। वैसे तो हमारे देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था है, इसके बावजूद यहां पर आम जनता व रसूखदारों के अलग—अलग मानक तय हैं। एक आम व्यक्ति इंसाफ की जंग लड़ते—लड़ते वर्षों बीत जाने पर हिम्मत तोड़ देता है तो वहीं रसूखदार जेल के अंदर बैठकर भी मौज काटते हैं। यह हमारे सिस्टम की कड़वी सच्चाई है।

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