वाराणसी। गाजीपुर सहित जनपद में आतंक का पर्याय बना कुख्यात अपराधी शिवशंकर उर्फ शिवा बिंद के सिर पर आखिर किसका हाथ है। यह सवाल इसलिए उठ रहा है कि पुलिस को उसकी लंबे समय से तलाश थी। लाख अभियान चलाने के बाद भी लंबे समय तक एक लाख का इनामी बदमाश शिवा बिंद पुलिस को चकमा देता रहा। लंबे समय तक वह पुलिस से बचता रहा और बड़े आराम से उसने अब न्यायालय में आत्मसमर्पण कर दिया। ऐसे में लोग सोच रहे हैं कि गाजीपुर पुलिस शिवा बिंद के पीछे पूरी मुस्तैदी के साथ लगी हुई थी आखिर उसके सिर पर किसका हाथ है कि वह पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ा और अंतत: नाटकीय ढंग से कोर्ट में सरेंडर करने में पूरी तरह से सफल रहा। जरायम की दुनिया के सूत्रों का कहना है कि बगैर किसी के संरक्षण के इतना कुख्यात अपराधी लंबे समय तक पुलिस से बच नहीं सकता, वह भी उस स्थिति में जब उसके सिर पर एक लाख रुपये का इनाम हो और पुलिस लगातार उसकी गिरफ्तारी के लिए खाक छान रही थी। निश्चित रूप से शिवा बिंद के सिर पर किसी न किसी का हाथ है, तभी वह लंबे समय तक पुलिस को छकाता रहा और अपनी प्लानिंग के तहत कोर्ट में आत्मसमर्पण कर दिया। वैसे भी माना जाता है कि राजनीति व अपराध जगत का बहुत गहरा संबंध होता है। वैसे जो भी हो यह जांच का विषय है। अब बात करते हैं कि शिवा बिंद के आत्मसमर्पण को किस तरह से देखा जाए। क्या यह पुलिस की लापरवाही है या फिर शिवा बिंद के उपर योगी सरकार का खौफ। पहली चीज यह तो स्पष्ट है कि पुलिस शिवा की गिरफ्तारी में असफल रही। ऐसे में यह पुलिस की असफलता है। दूसरी तरफ यदि शिवा बिंद लंबे समय बाद कोर्ट में आत्मसमर्पण करने को विवश हुआ तो यह योगी सरकार की ठोंको नीति की हनक है। अपराधियों को अब यह समझ में आ गया है कि अगर वह जेल के अंदर नहीं गये तो बाहर उनका सुरक्षित रहना मुश्किल है क्योंकि प्रदेश के अंदर एनकाउंटर में कई अपराधी ढेर हो चुके हैं। गौरतलब हो कि सदर कोतवाली के रजदेपुर देहाती निवासी शिवा बिंद पुलिस के लिए सिरदर्द बना हुआ था। शिवा बिंद ने वर्ष 2010 में वाराणसी के चेतगंज थाना क्षेत्र में एक सराफा व्यवसायी की गोली मारकर हत्या कर दिया था। 2013 में नंदगंज क्षेत्र में सराफा व्यवसायी की गोली मारकर हत्या करने के बाद बाइक व लाखों रुपये का जेवरात लूट लिया था। 2015 में अपने साथियों संग नंदगंज क्षेत्र में एक अन्य सराफा व्यवसायी को गोली मारकर लूट की घटना को अंजाम दिया था। 2016 में नगर के यूको बैंक के बाहर मनोज सिंह की हत्या व 28 लाख रुपये लूट के मामले में भी शिवा का नाम प्रकाश में आया था। शुरू में इसके उपर पुलिस की ओर से 50 हजार का इनाम रखा गया था, बाद में इसे बढ़ाकर एक लाख रुपये कर दिया गया। वहीं शिवा की ओर से गैंगेस्टर कोर्ट के जज गौरव कुमार के यहां आत्मसमर्पण किया गया। इसके अलावा पूर्व में शिवा बिंद की ओर से गाजीपुर में कई डाक्टरों से रंगदारी भी मांगी गई थी।

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