दिल्ली। भाजपा का एक चर्चित नारा है — सबका साथ, सबका विकास। अपने इसी नारे को भाजपा सियासत में भी चरितार्थ करती हुई दिख रही है। दरअसल उप्र में भाजपा की ओर से सैयद जफर इस्लाम को राज्यसभा में अपना उम्मीदवार घोषित करने का निर्णय लिया गया है। भाजपा के इस जफर कार्ड के पीछे कई मायने छिपे हुए हैं। भारतीय जनता पार्टी का सबसे बड़ा संदेश यह है कि उसके लिए सभी वर्ग के लिए दरवाजे खुले हैं। विपक्ष की ओर से जो सबसे बड़ा आरोप भाजपा पर बार—बार मुस्लिम विरोधी छवि को लेकर लगाया जाता है, उस पर भी एक तरह से पलटवार करने का काम किया गया है। अपने इस निर्णय के जरिये भाजपा उप्र में उदारवादी मुस्लिम वर्ग के बीच पैठ बनाने की कोशिश भी करेगी। उदारवादी मुस्लिम वर्ग को सियासी लिहाज से एक सकारात्मक संदेश देना भी भाजपा की कोशिश है। वैसे भी मुस्लिम महिलाओं के एक वर्ग में भाजपा की दस्तक हो चुकी है। तीन तलाक कानून के कारण मुस्लिम महिलाओं के एक धड़े की ओर से इस निर्णय को सराहा गया। वहीं सबसे बड़ा सवाल है कि आखिर सैयद जफर इस्लाम को राज्यसभा उम्मीदवार बनाने के पीछे क्या कोई और भी कारण है। माना जा रहा है कि मध्य प्रदेश में ज्योतिरादित्य सिंधिया को भाजपा खेमे में लाने का यह इनाम भी है। मध्य प्रदेश में ज्योतिरादित्य सिंधिया को भाजपा के पाले में लाने के पीछे अहम भूमिका सैयद जफर इस्लाम की बताई जाती है। गौरतलब हो कि सपा के निलंबित अमर सिंह के निधन से रिक्त सीट पर मध्य प्रदेश के जफर को भाजपा की ओर से अपना उम्मीदवार घोषित कियागया है। वैसे माना जा रहा है कि जफर का निर्विराध निर्वाचन होना तय है।

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