दिल्ली। किसी भी देश के लिए युवा वर्ग काफी मायने रखता है। मायने रखने का भी प्रमुख कारण है क्योंकि युवा वर्ग के पास ही नई सोच व उर्जा का भंडार होता है। ऐसे में युवा वर्ग को नजरंदाज करके विकास की बातें करना बेमानी है। यदि आज के युवा वर्ग व उसके भविष्य को चुनौतियों को लेकर बात करें तो कई तथ्य सामने आते हैं। मसलन केंद्र से लेकर राज्यों तक सरकारी नीतियों में काफी हद तक बदलाव आई हैं। जिसका काफी असर युवा वर्ग पर पड़ा है। एक समय था जब सरकारी विभाग में पूरी की पूरी भर्ती चाहे पद कोई भी स्थायी नियुक्ति की निकलती थी। इसके बाद संविदा का दौर आया लेकिन मौजूद वक्त में सरकार की ओर से आउटसोर्सिंग प्रथा को बढ़ावा दिया जा रहा है। जाहिर सी बात है कि इस व्यवस्था के कारण का कम खर्च में सरकारें व्यवस्थाएं संचालित करने में सफल हो रही हैं। लेकिन इसका खामियाजा युवा वर्ग को भुगतना पड़ रहा है। ठेके व्यवस्था पर सेवा देने के बावजूद युवा वर्ग के मन में अपने भविष्य को लेकर अनिश्चितता रहती है क्योंकि गारंटी नहीं होती है कि संंबंधित कंपनी का संबंधित सरकार से एग्रीमेंट कब तक रहेगा। इसलिए भविष्य में उक्त सेवा समाप्त होने की संभावना भी बनी रहती है। वर्तमान में अधिकांश सरकारी सेवाओं के लिए आउटसोर्सिंग व्यवस्था के तहत ही आवेदन मांगे जा रहे हैं। इस व्यवस्था के कारण युवाओं के शोषण की संभावना भी काफी हद तक बन गई है।