दिल्ली। समय—समय पर कुदरत का कहर बरपता रहता है। मानव से लेकर सभी प्रकार का जीवन इससे प्रभावित होता है। ऐसी ही एक घटना आज से सैकड़ों वर्ष पहले घटित हुई थी। जिसके कारण 25 हजार लोग मौत के शिकार हुए थे। भयानक बाढ़ के कारण दुनिया के कई देश चपेट में आये थे। इस बाढ़ को सेंट मर्सिलस फ्लड के नाम से जाना जाता है। इसको ग्रोट मन्ड्रेंकी चक्रवात के नाम से भी जाना जाता है। यह बात 16 जनवरी वर्ष 1362 की है। प्रभावित देशों के लोग आज भी इसे याद करके सिहर उठते हैं। इस तूफान को सेकेंड सेंट मर्सिलस फ्लड के नाम से भी जाना जाता है। जिस दिन यह तूफान उठा, उस दिन सेंट मर्सिलस का फीस्ट डे मनाया जाता है। सेंट मर्सिलस एक सेंचुरिआन थे, जिन्हें कैथोलिक चर्च व पूर्वी रूढ़िवादी चर्च शहीद संत के रूप में पूजते थे। वहीं 16 जनवरी वर्ष 1219 के दिन भी ऐसी ही बाढ़ आई थी। जिसके कारण 36000 लोग डूब गये थे। इस बाढ़ को पहला सेंट मर्सिलस फ्लड के नाम से जाना जाता है। सेंट मार्सिलस फ्लड यानी बाढ़ में उत्तरी सागर में एक बेहद बड़ा तूफान उठा था, जिसका असर दूर इंग्लैंड व नीदरलैंड से लेकर डेनमार्क व जर्मनी के तट पर देखा गया था। हर ओर केवल पानी ही पानी नजर आ रहा था। जहां इंसान रहते थे, वे जगहें द्वीपों में परिवर्तित हो गये थे। रंघोल्ट, रेवेंसर आड व हार्बर जैसे कस्बों व जनपदों का नामो निशान मिट गया था। वहीं इंग्लैंड को भी काफी नुकसान हुआ था।

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