लखनऊ। अब इसे कुछ भाजपा विधायकों का बागी तेवर कहें या फिर भाजपा का अंदरुनी कलह लेकिन इतना जरूर है कि प्रदेश में भाजपा के अंदर सब कुछ ठीक—ठाक नहीं है। जिस प्रकार से भाजपा के कुछ बड़बोले विधायक सार्वजनिक व सोशल मीडिया के प्लेटफार्म पर आये दिन बयान दे रहे हैं, उससे तो यही प्रतीक होता कि या तो इन विधायकों के अंदर योगी सरकार को लेकर असंतोष है या फिर सरकार व संगठन का नियंत्रण ऐसे विधायकों के उपर नहीं है। ऐसे बड़बोले विधायकों के बयानों के कारण विपक्ष को बैठे—बैठे प्रदेश सरकार पर हमला करने का मुद्दा मिल जा रहा है। जिसके कारण भाजपा व प्रदेश सरकार की जमकर फजीहत हो रही है। ये संकेत बता रहे हैं कि आगामी विधासभा चुनाव में प्रदेश के अंदर भाजपा की राह आसान नहीं रहेगी। जिस प्रकार से बीते विधानसभा चुनाव में भाजपा की ओर से कुशलतापूर्वक जातीय तथा क्षेत्रीय समीकरण को साध लिया गया था, इस बार उतना ही कठिन व चुनौतीपूर्ण लग रहा है। ये सब विपक्ष के कारण नहीं बल्कि भाजपा के ही कुछ बड़बोले विधायकों व सांसदों के कारण हो रहा है। याद कीजिए जब लोनी क्षेत्र के विधायक नंद किशोर गुर्जर की ओर से पुलिसिया उत्पीड़न का मामला उठाया गया था तो सदन में पूरा विपक्ष उनके पक्ष में आ गया था और योगी सरकार पर जमकर निशाना साधा गया था। सुल्तानपुर के विधायक देवमणि द्विवेदी की ओर से पार्टी लाइन से इतर जाते हुए ब्राह्मणों की हत्या व उत्पीड़न मामला उठाकर अपनी ही सरकार को कटघरे में खड़ा किया गया था। जिस समय भाजपा व योगी सरकार के विपक्ष के ब्राह्मण विरोधी हमलों को झेल रही थी, उसी समय उसके अपने ही विधायक की ओर से किया गया यह हमला विपक्ष को और धार देने का काम किया। इसी तरह गोरखपुर में विधायक डा. राधा मोहन दास अग्रवाल व सांसद रविकिशन के बीच बीते दिनों किस तरह खुलेआम एक—दूसरे के खिलाफ बयान दिया गया, वह जगजाहिर है। अब यह देखने वाली बात होगी कि भाजपा ऐसे विधायकों व सांसदों पर अंकुश लगाने में कामयाब रहेगी या फिर इनके कारण आगामी विधानसभा चुनाव में पार्टी को कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा।

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